JAC Board Class 11th Business Study Monthly Test Solution(October, 2021)

JAC Board Class 11th Business Study Monthly Test Solution(October 2021):

 

JAC Board Class 11th Business Study Monthly Test Solution(October, 2021)

झारखण्ड शैक्षणिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद्झा रखण्ड ,राँची , मासिक जाँचपरीक्षा
विषय- Business Studies

माह-अक्टूबर
समय-2 घंटे
पूर्णांक
कक्षा-11
पूर्णांक- 40

 

बहु-विकल्पीय प्रश्र (Multiple Choice Questions)1×10=10

1. व्यवसाय है।(Business is)-
(a) कला(Art) (b) विज्ञान (Science)
(c) दोनों (Both) (d) इनमें से कोई नहीं (None of these )

Ans: (c) दोनों (Both)

2. सबसे व्यापक क्षेत्र है (The most – wide scope is)-
(a) व्यापार(Of Trade)
(b) वाणिज्यका(Of Commerce)
(c)  उद्योगका(Of Industry)
(d) व्यवसाय का (Of Business).

Ans: (d) व्यवसाय का (Of Business).

3. व्यवसाय का उद्देश्य है (Objective of business is)-
(a) लाभ उद्देश्य (Profit Objective)
(b) सेवा उद्देश्य (Service Objective)
(c) विलाभ-सेवा उद्देश्य दोनों (Profit – Service both Objective)
(d) कर चोरी (Tax – Evasion)

Ans: (c) विलाभ-सेवा उद्देश्य दोनों (Profit – Service both Objective)

4. व्यावसायिक जोखिम के कारण है(Causes of business risk are)-
(a) मानवीय(Human)
(b) भौतिक (Physical)
(c) प्राकृतिक(Natural)
(d) येसभी (All of these)

Ans: (d) येसभी (All of these)

5. व्यवसाय के अंतर्गत (Business Includes)-
(a)मानव की समस्त क्रियाएं आती हैं (AII Human Activities)
(b)मानवकी समस्त आर्थिक क्रियाएं आती है (All Human Economic Activities
(c) मानव की समस्त अनार्थिक क्रियाएं आती है (All Human Non- economic Activities)
(d) इनमेंसे कोई नहीं (None of these)

Ans:(b)मानवकी समस्त आर्थिक क्रियाएं आती है (All Human Economic Activities

6. निम्न में से कौन एक आर्थिक क्रिया नहीं है(Which of the following is not an economic activity)-
(a) वस्तुओं का उत्पादन (Production of goods)
(b) वस्तुओं में व्यापारTrading in goods)
(c) पेशेवर सेवा(Professional services) er. akhilesh classes 4u
(d) समाज सेवा (Social Service)

Ans: (d) समाज सेवा (Social Service)

7. कर्मचारी की बेईमानी किस तरह का व्यवसायिक जोखिम है…………?

(Dishonesty of Employee’s is the ………..types of cause of business risk?)

a) मानवीय(Human)
(b) भौतिक (Physical)
(c) प्राकृतिक(Natural)
(d) येसभी (All of these)

Ans: a) मानवीय(Human)

8. मौसम की भांति व्यवसाय भी सदैव हमारे साथ रहता है यह कथन किससे संबंधित है।
(“Business like weather is with us everyday.” Who said this out of the following…)
(a) हैने (Haney)
(b) मार्शल (Marshal)
(c) बाटलीबॉय (Batliboi)
(d)  हीलर(Wheeler

9. निम्न में से कौन-सा व्यावसायिक अनिश्चितता का उदाहरण है……?
(which of the following is the example of business uncertainties……..?)
(a) भूकंप (Earthquake)
(b) सूखा (Drought)
(c) मूल्यों में परिवर्तन(Change in prices)
(d) येसभी (All of these)

Ans: (a) भूकंप (Earthquake)

10.इनमें से कौन -सी व्यवसायिक क्रिया है।
(which of these is the business activity)-

(a) माल का क्रय विक्रय करना (Purchase sale of Goods)
(b) मंदिर में पूजा करना (Worship in the Temple)
(c) ग्राहकों के साथ धोखा करना (Fraud with the Customers)
(d) सरसों के तेल में मिलावट करना (Adulteration in the Mustard Oil)
B. लघु उत्तरीय प्रशन (Short Answer Type question)

Ans: (a) माल का क्रय विक्रय करना (Purchase sale of Goods)

 

B. लघु उत्तरीय प्रश्न(Short Answer Type Question): 2×4=8

 

11.व्यवसाय की अवधारणा से क्या आशय है? (What is meant by concept of business ?)
Ans: व्यवसाय की अवधारणा भी समय एवं परिस्थितियों के अनुरूप बदलती रही है। परिवर्तन
का क्रम तब तक निरन्तर रूप में चलता रहेगा जब तक समस्त व्यावसायिक वातावरण
पूर्णरूप में गतिशील एवं विकसित न हो जाय।

 

12.आर्थिक क्रियाएं किसे कहते हैं? (What do you mean by economic activities?)
Ans: आर्थिक क्रियाएँ (Economic Activities) मनुष्य की वे क्रियाएँ जो धन के उत्पादन,
विनिमय, वितरण और उपभोग से सम्बन्धित हैं, ‘आर्थिक क्रियाएँ कहलाती हैं, जैसे
किसान द्वारा खेत में हल चलाना (धन का उत्पादन), दुकानदार द्वारा ग्राहकों को माल
बेचना आदि।

13.पेशा क्या है? (What is profession?)
Ans: पेशा (Profession)-‘पेशा वह धन्धा है, जिसमें एक व्यक्ति अपने विशिष्ट ज्ञान और
प्रशिक्षण के आधार पर अन्य व्यक्तियों की व्यक्तिगत सेवा करता है। जैसे-एक वकील
अपनी योग्यता एवं अनुभव के आधार पर अपने मुवक्किल (Client) की किसी मामले
में जीत कराता है, एक डॉक्टर अपने व्यक्तिगत अनुभव के बल पर रोगी के रोग का पता
करता है और उसका उपचार समझता है।

14.व्यवसायमेंलाभ की क्या भूमिका होती है (What is the role of profit in business?)
व्यवसाय में लाभ की भूमिका एक “लाभ प्रेरक” (Profit Motive) के रूप में माना
जाता है।
लाभ एक व्यवसायी के परिश्रम एवं साहस का प्रतिफल है। आर्थिक दृष्टि से व्यवसाय का उद्देश्य लाभ कमाना ही होता है। व्यवसायी व्यवसाय इसलिए करता है ताकि लाभ प्राप्त करके वह भी अन्य व्यक्ति के समान अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति कर सके। यह तो एक सामान्य बात है कि कोई भी व्यक्ति ऐसा व्यवसाय कदापि नहीं करेगा जिसमें उसे लाभ के रूप में कुछ न मिलता हो।

C. लघु उत्तरीय प्रशन (Short Answer Type Question) 3×4 =12

15. व्यवसाय की कोई चार विशेषताएं बतलाइए
(Explain any four characteristics of business.)
Ans: व्यवसाय की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
(1) मानवीय आर्थिक क्रियाएँ (Human Economic Activities) – व्यवसाय का सबसे प्रमुख लक्षण इसमें मानवीय आर्थिक क्रियाओं के तत्व का निहित होना है। व्यवसाय केवल मानव द्वारा ही किया जाता है, न कि पशु-पक्षियों या जानवरों द्वारा यही नहीं, यह मानव भी केवल आर्थिक मानव ही होना चाहिए, न कि अनार्थिक मानव जैसे-साधू तथा सन्यासी मानव द्वारा आर्थिक क्रियाएँ धन कमाने के लिए सम्पन्न की जाती हैं।
(2) साहस (Entrepreneurship)- प्रत्येक प्रकार के व्यवसाय में साहस का लक्षण अवश्य निहित होता है क्योंकि साहसी व्यक्ति ही जोखिम उठाने की क्षमता रखते हैं। व्यवसाय साहस की आधारशिला पर ही आधारित है। किसी ने ठीक ही कहा है, “साहस नहीं तो व्यवसाय नहीं।” एक साहसी किसी भी व्यवसाय की स्थापना करने से पूर्व उसके व्यावहारिक पहलू पर गम्भीरता से विचार करता है और इसके पश्चात् ही उसकी स्थापना का निर्णय करता है।

(3) जोखिम एवं भावी सफलता (Risk and Future Success)- आप किसी भी व्यवसाय को क्यों न लें, उसमें जोखिम का लक्षण अवश्य होता है। इस सम्बन्ध में एक कहावत भी है-“व्यवसाय जोखिम का खेल है। ” हाँ, इतना अवश्य है कि कुछ व्यवसायों में जोखिम अधिक होता है और कुछ में कम, किन्तु सभी व्यवसायों में कुछ- -न-कुछ जोखिम अवश्य ही होता है क्योंकि “लाभ जोखिम का प्रतिफल है। जिन व्यावसायिक क्रियाओं में जोखिम नहीं होता, उन्हें व्यवसाय की श्रेणी में सम्मिलित नहीं किया जा सकता है। अतः एक व्यवसायी लाभ कमाने एवं भावी सफलता (लाभ) की आशा में जोखिम लेने के लिए सहर्ष तैयार हो जाता है। यदि व्यवसाय से सफलता (लाभ) के लक्षण को पृथक् कर दिया जाय तो शायद ही कोई व्यवसायी जोखिम लेने के लिए तैयार होगा।

(4) विनिमय द्वारा लाभ (Profit through Exchange)-समस्त व्यवसायों का चतुर्थ प्राथमिक लक्षण सम्बन्धित पक्षकारों के पारस्परिक लाभ के लिए वस्तुओं एवं सेवाओं के विनिमय द्वारा लाभ कमाना है। यदि वस्तुओं तथा सेवाओं का उत्पादन एवं वितरण लाभ के लिए नहीं किया जाता तो उसे व्यवसाय नहीं कह सकते हैं। यही नहीं, यदि वस्तुओं एवं सेवाओं का विनिमय लाभ के लिए नहीं अपितु उपयोग के लिए किया जाय तो भी वह व्यवसाय नहीं कहलायेगा।

16. आर्थिकक्रियाओतथाअनार्थिकक्रियाओंमेंअंतरकीजिए। (Differentiate between economic and non-economic activities.)

Ans:

अन्तर का आधार
(Basis of Difference)

आर्थिक क्रियाएं
(Economic Activities)

अनार्थिक क्रियाएँ

(Non-economic Activities)
अर्थ वे गतिविधियाँ जो लोगों द्वारा लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से की जाती हैं, आर्थिक गतिविधियाँ कहलाती हैं। लोगों की मनोवैज्ञानिक संतुष्टि से संबंधित गतिविधियों को गैर-आर्थिक गतिविधियों के रूप में जाना जाता है।
उद्देश्य लाभ या लाभ अर्जित करना। मनोवैज्ञानिक संतुष्टि प्राप्त करने के लिए।
परिणाम वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन। मनुष्य को मानसिक संतुष्टि मिली।
उदाहरण संख्या 1 व्यवसाय, पेशा और रोजगार। धार्मिक, सामाजिक सेवा और अन्य कल्याणकारी गतिविधियाँ।
उदाहरण संख्या 2 इसमें बिक्री और खरीद गतिविधियां शामिल थीं। परिवार के सदस्यों के लिए खाना बनाना या गरीब लोगों को मुफ्त भोजन उपलब्ध कराना आदि।
पैसे की भूमिका पैसा बुनियादी तत्व है और पैसे के बिना कोई भी गतिविधि पूरी नहीं होगी। पैसे से संबंधित कोई कार्य नहीं है।
ज्ञान/डिग्री डॉक्टरों, वकीलों, शिक्षकों, प्रबंधकों को अपनी गतिविधियों को करने के लिए विशेष ज्ञान और डिग्री की आवश्यकता होती है। गैर-आर्थिक गतिविधि किसी भी व्यक्ति द्वारा की जा सकती है और इसके लिए कोई विशेष डिग्री करने की आवश्यकता नहीं है।
जोखिम का आधार व्यवसाय में जोखिम और अनिश्चितता शामिल हैं। किसी भी गतिविधि के संबंध में कोई जोखिम नहीं है।
गतिविधियों में नियमितता व्यापार में नियमितता जरूरी है। यह प्रकृति में नियमित हो भी सकता है और नहीं भी।

 

17. रोजगार से क्या आशय है? रोजगार की दो विशेषताएं बताइए। (What is meant by employment? Explain two characteristics of employment.)

Ans: रोजगार एक आर्थिक क्रिया है जिसमें लोग (कर्मचारी) दूसरों के लिए कार्य करते हैं जिसके प्रतिफलस्वरूप पारिश्रमिक प्राप्त करते हैं। यह पारिश्रमिक वेतन (Salary) अथवा मजदूरी (Wages) आदि के रूप में हो सकता है। इसका भुगतान सेवा की शर्तों के अनुरूप मासिक, साप्ताहिक अथवा दैनिक हो सकता है। रोजगार स्थायी (Permanent), अस्थायी (Temporary) अथवा आकस्मिक (Casual) हो सकता है।

रोजगार की विशेषताएँ (Characteristics of Employment) रोजगार की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

(1) पारिश्रमिक के बदले श्रम (Labour in Exchange of Remuneration) – रोजगार में सम्बन्धित कर्मचारी निर्धारित पारिश्रमिक के बदले अपना श्रम (सेवाएँ) प्रदान करता है। यह पारिश्रमिक किसी भी ढंग से कार्यानुसार या समयानुसार दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक अथवा मासिक दिया जा सकता है।

(2) दूसरों के लिए सेवा (Service to others)-रोजगार दूसरों के लिए सेवाएँ प्रदान
करता है।

18. व्यवसाय को एक आर्थिक क्रिया क्यों समझा जाता है? (Why is business considered an economic activity?)

Ans:

व्यवसाय भी एक आर्थिक क्रिया है। इसके विभिन्न रूपों का हमारे दैनिक जीवन एवं आर्थिक प्रणाली से इतना सीधा और घनिष्ठ सम्बन्ध है कि सम्भवतः शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति होगा जो इससे परिचित न हो। ह्वीलर के शब्दों में, “मौसम की भाँति व्यवसाय भी सदैव हमारे साथ रहता है।” (Business, like weather, is with us everyday.”) प्रातः काल से लेकर सायंकाल तक प्रत्येक व्यक्ति विभिन्न वस्तुओं का उपभोग करता है जो उसे व्यवसाय द्वारा उपलब्ध करायी जाती हैं। यही नहीं, वह अनेक ऐसे व्यक्तियों से लेन- देन  करता है जो व्यवसाय में ही संलग्न हैं। गली के नुक्कड़ अथवा बाजार में स्थित पंसारी, बिसाती, हलवाई, बजाज, दर्जी, नाई, धोबी, मोची आदि अनेक ऐसे व्यापारी हैं जिनसे किसी-न-किसी रूप में प्रत्येक व्यक्ति का सम्पर्क पड़ता ही है।

मनुष्य की वे क्रियाएँ जो धन के उत्पादन, विनिमय, वितरण और उपभोग से सम्बन्धित हैं, ‘आर्थिक क्रियाएँ कहलाती हैं, अतः इसी श्रेणी में व्यवसाय भी आता है इसीलिए व्यवसाय को आर्थिक क्रिया समझा जाता है।

“व्यवसाय में वे समस्त मानवीय आर्थिक एवं वैध क्रियाएँ सम्मिलित होती हैं जिनका उद्देश्य वस्तुओं एवं सेवाओं के नियमित एवं निरन्तर उत्पादन हस्तान्तरण अथवा विक्रय द्वारा समाज की आवश्यकताओं की पूर्ति करके लाभ कमाना है। इस प्रकार व्यवसाय केवल एक क्रिया मात्र न होकर विभिन्न क्रियाओं का समूह है।” इसी कारण इसे आर्थिक क्रिया समझा जाता है।

D. दीर्घ उत्तरीय प्रशन (Long Answer Type question) 5×2= 10

19. व्यवसाय की अवधारणा से क्या आशय है व्यवसाय की प्रकृति को स्पष्ट कीजिए। (What is meant by concept of business explain the nature of business)
Ans: व्यवसाय की अवधारणा भी समय एवं परिस्थितियों के अनुरूप बदलती रही है। परिवर्तन का
क्रम तब तक निरन्तर रूप में चलता रहेगा जब तक समस्त व्यावसायिक वातावरण पूर्णरूप में
गतिशील एवं विकसित न हो जाय। सुविधा की दृष्टि से व्यवसाय की अवधारणा का अध्ययन निम्नलिखित दो शीर्षकों के अन्तर्गत किया जा सकता है

(1) व्यवसाय की प्राचीन अवधारणा (Old Concept of Business)-प्राचीन अवधारणा के अनुसार व्यवसाय शब्द का उपयोग केवल उन क्रियाओं के लिए किया जाता था जो धन कमाने के लिए की जाती थीं। इस अवधारणा के अनुसार व्यवसाय का एकमात्र उद्देश्य येन केन तरीकों से अधिकतम लाभ कमाकर धन-सम्पत्ति एवं आर्थिक सत्ता का केन्द्रीकरण करना था चाहे इसके लिए सामाजिक न्याय की बलि क्यों न देनी पड़े। प्रत्येक आर्थिक क्रिया का लक्ष्य धन कमाना ही था। उस समय व्यवसाय के क्षेत्र में मुनाफाखोरी का बोलबाला था।

(II) व्यवसाय की आधुनिक अवधारणा (Modern Concept of Business)-व्यवसाय की आधुनिक अवधारणा के अनुसार व्यवसाय एक सामाजिक व आर्थिक क्रिया है जिसका उद्देश्य सेवा के द्वारा लाभ कमाना है। आधुनिक व्यवसाय पहले ग्राहक की सेवा करता है तत्पश्चात् ग्राहक की सेवा के माध्यम से उचित लाभ कमाता है। इस प्रकार ग्राहक सेवा को प्रथम तथा उचित लाभ को द्वितीय स्थान प्राप्त है। व्यवसायी मुनाफा कमाता है, मुनाफाखोरी नहीं करता है।

व्यवसाय में वे समस्त मानवीय आर्थिक एवं वैध क्रियाएँ सम्मिलित होती हैं जिनका उद्देश्य वस्तुओं एवं सेवाओं के नियमित एवं निरन्तर उत्पादन हस्तान्तरण अथवा विक्रय द्वारा समाज की आवश्यकताओं की पूर्ति करके लाभ कमाना है। इस प्रकार व्यवसाय केवल एक क्रिया मात्र न होकर विभिन्न क्रियाओं का समूह है।
•व्यवसाय की प्रकृति को निम्नलिखित छ भागों में बीटा जाता है:-
(1) व्यवसाय कला तथा विज्ञान दोनों है (Business is both Art and Science
(2) व्यवसाय एक सामाजिक क्रिया है (Business is मिठाई की संपत्ति को हम वैसा एक कला और विज्ञान दोनों कर सकते हैं तो पैसा एक सामाजिक क्रिया हैa Social Activity)
(3) व्यवसाय एक तन्त्र है Business is aSystem)
(4) व्यवसाय एक मानवीय क्रिया है (Business is a Human Activity)
(5) व्यवसाय एक आर्थिक क्रिया है Business is an Economic Activity)
(6) व्यायका अन्य विषयों से पनिष्ठ सम्बन्ध है (Business is closely Related with other
Subjects)

20. व्यवसायिक जोखिम की अवधारणा को समझाइए तथा इसके कारणों का भी वर्णन कीजिए। (Explain the concept of business risk and its causes)

Ans: व्यावसायिक जोखिम से अभिप्राय लाभ या हानि होने होने की उस संभावना से है जिस पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता है तथा जो अनिश्चित या अचानक हुई घटनाओ के कारण होते है। जैसे- उपभोगताओ की मांग में परिवर्तन, आग लगाना, चोरी होना आदि |
व्यासायिक जोखिम का अर्थ : जोखिम व्यवसाय की एक मुख्य विशेषता है। व्यवसाय में इस विशेषता के पाए जाने का कारण व्यवसाय क्रियाओं का भविष्य में लगातार चलते रहना है और भविष्य अनिश्चित होता है। अनिश्चितता जोखिम की जन्मदाता होती है। कल क्या होने वाला है इस बारे में निश्चित रूप से कुछ नही खा जा सकता है व्यवसाय में हानि की सम्भावना को ही व्यावसायिक जोखिम कहते है।

व्यावसायिक जोखिम के कारण (Causes of Business Risk):

(a) प्राकतिक कारण (NaturalCauses)-इसके अन्तर्गत वे कारण आते हैं जिन पर मनुष्य का कोई नियन्त्रण (अधिकार) नहीं होता और जिनका होना उसके द्वारा रोका नहीं जा सकता। प्रायः इनमें ऐसे कारण आते हैं जिनका होना निश्चित नहीं होता और जिनके विषय में निश्चित भविष्यवाणी भी नहीं की जा सकती; जैसे-बाढ़ का आना, भूचाल आना, तूफान आना, आग लगना, समुद्री तूफान आना अथवा किसी महत्वपूर्ण कर्मचारी की मृत्यु हो जाना आदि। अध्ययन की सुविधा के लिए इन्हें निम्नलिखित प्रकार से वर्गीकृत किया जा सकता है-
(i)भूगर्भ में होने वाले परिवर्तन (Geological Changes)-भूगर्भ में होने वाले परिवर्तन मनुष्य के लिए अभिशाप सिद्ध होते हैं; जैसे-भूकम्प आना। भूकम्प के एक झटके से बड़ी-से-बड़ी इमारतें गिरकर मिट्टी में मिल सकती है। कभी-कभी भूगर्भ में होने वाले कुछ परिवर्तन मानव के लिए वरदान भी सिद्ध होते हैं; जैसे-खनिज भण्डारों की खोज करना अथवा भूगर्भ में छिपे तेल-क्षेत्र का पता लगाना आदि।

(ii) मौसमी परिवर्तन (Seasonal Changes)-मौसमी परिवर्तनों का कृषि के साथ-साथ उद्योग-धन्धों पर भी प्रभाव पड़ता है। इसमें आंधी-तूफान, बाढ़, सूखा,आगजनी, हिमपात आदि उल्लेखनीय हैं। मौसमी परिवर्तन से जल एवं विद्युत योजनाएँ अस्त-व्यस्त हो जाती है जिससे किसी भी समय बिजली संकट उत्पन्न होने की आशंका बनी रहती है।

(iii) अन्य प्राकृतिक प्रकोप (Other Natural Calamities)-इसमें टिट्टी दल का फसल पर हमला बोल देना, वायुमण्डल में दूषित गैस का फैल जाना, बिजली गिरना आदि प्रकोप शामिल किये जाते हैं।

 

(b) मानवीय कारण (Human Causes)-व्यावसायिक जोखिम के कारणों में मानवीय कारण अधिक महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इसमें उन सभी कारणों की गणना की जाती है जो मनुष्य की बेईमानी, दुर्भावना, असावधानी, उतावलेपन और नासमझी के कारण होते हैं। मानवीय जोखिमों की रोकथाम मनुष्य, समाज और व्यवसायी सबके लिए हितकर मानी जाती है, इन्हें सद्विश्वास, प्राप्त सूचनाओं, संयम और पूर्ण सतर्कता के साथ व्यवहार करके रोका जा सकता है अथवा कुछ कम किया जा सकता है। इसमें निम्नलिखित जोखिम  उल्लेखनीय हैं-
(i) कर्मचारी एवं ग्राहकों की बेईमानी (Dishonesty of Employee and Customers)-जब व्यवसायी के अपने ही कर्मचारी माल की चोरी करने लगें या रोकड़ और माल में हेराफेरी करने लगें अथवा जब उसके ग्राहक माल खरीदकर माल का मूल्य चुकाने में असमर्थ हो जायें अथवा भुगतान करने से इन्कार कर दें तो उसे व्यावसायिक जोखिम कहते हैं।
(ii) मनुष्यकृत कारण (Man-made Causes)-जब मानवीय दुर्भावनाओं के आधार पर दंगे हो जाते हैं जिनसे लूटमार और आगजनी हो जाती है अथवा ‘दिल्ली बन्द’ या ‘मुम्बई बन्द’ जैसी घटनाएँ हो जाती हैं, तब व्यावसायिक जोखिम उत्पन्न हो जाता है.

(iii) हड़ताल,तालाबन्दी एवं घेराव (Strike, Lockout and Gharao)-जब व्यवसाय के मालिक बिना पूर्ण सोच-विचार के कोई ऐसा निर्णय ले लेते हैं जिसका श्रमिक वर्ग पर विपरीत प्रभाव पड़ता है, तब व्यवसाय में हड़ताल, तालाबन्दी या घेराव के कारण व्यावसायिक जोखिम उत्पन्न हो जाती है।
(iv) असावधानी के कारण जोखिम (Risk due to Carelessness)-व्यवसाय के कर्मचारी की असावधानी के कारण भी व्यावसायिक जोखिम उत्पन्न हो जाती है; जैसे-लापरवाही से बीड़ी-सिगरेट फेंकने से आग लग जाना अथवा सड़क पर असावधानी से चलने के कारण दुर्घटना हो जाना अथवा स्कूटर पर हैलमेट न पहनकर चलने के कारण दुर्घटना होने पर मृत्यु हो जाना आदि।

(b) आर्थिक कारण (Economic Causes)-आर्थिक कारणों से आशय किसी वस्तु की माँग व पूर्ति एवं बाजार में उतार-चढ़ाव लाने के कारणों से है जिनके कारण व्यावसायिक जोखिम उत्पन्न होता है; जैसे-

(i) मूल्यों में परिवर्तन होना, (ii) बाजार में मन्दी (Depression) एवं तेजी (Boom) आना, (iii) प्रतियोगिता में कमी अथवा वृद्धि होना, (iv) सरकार की व्यावसायिक नीतियों में परिवर्तन (जैसे-औद्योगिक नीति में परिवर्तन, कर नीतियों में परिवर्तन, आयात-निर्यात नीति में परिवर्तन आदि),(v) फैशन में परिवर्तन,
(vi) ग्राहकों की प्रवृत्ति में परिवर्तन आदि।

(c) भौतिक कारण (Physical Causes)-भौतिक कारणों में उन सभी तकनीकी एवं यान्त्रिक कारणों को सम्मिलित किया जाता है, जिनसे व्यावसायिक सम्पत्ति, यन्त्र अथवा सामग्री को हानि पहुँचने की जोखिम रहती है। उदाहरण के लिए, जब किसी तकनीकी परिवर्तन के कारण नई मशीन पुरानी मशीन को चलन से बाहर कर देती है, तब व्यावसायिक जोखिम उत्पन्न हो जाता है। इसी प्रकार बायलर में विस्फोट हो जाना यान्त्रिक कारण है जिससे व्यावसायिक जोखिम उत्पन्न हो जाता है। भोपाल गैस काण्ड इसका ज्वलन्त उदाहरण है।

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